संस्कृत में गिनती 1 से 100 तक


संस्कृत गिनती
– संस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषा मानी जाती है। आस्तिक भारतीय इसे सीधे परमात्मा के मुख से नि:सृत भाषा या वाक्प्रवाह मानते हैं, इसी से इसे 'देवभाषा' भी कहते हैं। 'सस्कृत' शब्द 'सम् + सुट् + कृ + क्त' रूप में बना है। इसका अर्थ है 'प्रकृतिप्रत्ययदि से संस्कार की गई भाषा'।


हम यहां संस्कृत में 1 से 100 तक की गिनती दे रहे है। जिसे आप आसानी से डॉउनलोड भी कर सकते है। यह गिनती TGT, PGT, UGC-NET/JRF, C-TET, UP-TET, DSSSB, GIC and Degree College Lecturer, M.A., B.Ed. and Ph.D प्रवेश परीक्षाओं के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

पुल्लिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
1. प्रथम: (पहला) प्रथमा प्रथमम्
2. द्वितीय: (दूसरा) द्वितीया द्वितीयम्
3. तृतीय: (तीसरा) तृतीया तृतीयम्
4. चतुर्थ: (चौथा) चतुर्थी चतुर्थम्
5. पञ्चम: (पाँचवाँ) पञ्चमी पञ्चम्
6. षष्ठ: (छठा) षष्ठी षष्ठम्
7. सप्तम: (सातवाँ) सप्तमी सप्तमम्
8. अष्टम: (आठवाँ) अष्टमी अष्टमम्
9. नवम: (नौवाँ) नवमी नवमम्
10. दशम: (दसवाँ) दशमी दशमम्
11. एकादश: (ग्यारहवाँ) एकादशी एकादशम्
12. द्वादश: (बारहवाँ) द्वादशी द्वादशम्
13. त्रयोदश: (तेरहवाँ) त्रयोदशी त्रयोदशम्
14. चतुर्दश: (चौदहवाँ) चतुर्दशी चतुर्दशम्
15. पञ्चदश: (पन्द्रहवाँ) पञ्चदशी पञ्चदशम्
16. षोडश: (सोलहवाँ) षोडशी षोडशम्
17. सप्तदश: (सतरहवाँ) सप्तदशी सप्तदशम्
18. अष्टादश: (अठारहवाँ) अष्टादशी अष्टादशम्
19. एकोनविंश: (उन्नीसवाँ) एकोनविंशी एकोनविंशम्
20. विंश: (बीसवाँ) विंशी विंशम्
21. एकविंश: (इक्कीसवाँ)
एकविंशी
एकविंशम्
22. द्वाविंश: (बाईसवाँ) द्वाविंशी द्वाविंशम्
23. त्रयोविंश: (तेईसवाँ) त्रयोविंशी त्रयोविंशम्
24. चतुर्विंश: (चौबीसवाँ) चतुर्विंशी चतुर्विंशम्
25. पञ्चविंश:
(पञ्चीसवाँ) पञ्चविंशी पञ्चविंशम्
26. षड् विंश: (छब्बीसवाँ) षड्विंशी षड्विंशम्
27. सप्तविंश:
(सत्ताईसवाँ)
सप्तविंशी सप्तविशंम्
28. अष्टाविंश: (अट्टाईसवाँ) अष्टाविंशी अष्टाविंशम्
29. एकोनत्रिश: (उन्तीसवाँ) एकोनत्रिंशी एकोनत्रिंशम्
30. त्रिंश: (तीसवाँ) त्रिंशी त्रिंशम्


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