'शत्रु संपत्ति विधेयक' राज्यसभा में पारित


राज्यसभा ने 10 मार्च, 2017 को विपक्ष की गैरमौजूदगी में करीब 50 साल पुराने शत्रु संपत्ति कानून Amend Enemy Property Act संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। इस विधयेक में युद्ध के बाद पाकिस्तान एवं चीन पलायन कर गए लोगों द्वारा छोड़ी गयी संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए हैं।




उच्च सदन ने शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक 2016 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन ने सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधनों को भी स्वीकार कर लिया।

क्या है शत्रु संपत्ति (Enemy Properties) ? 

भारत-पाकिस्तान के बीच साल 1965 व 1971 और चीन के साथ 1962 में हुए युद्ध के बाद कई लोग देश छोड़ कर चले गए। भारत रक्षा अधिनियम के मुताबिक, जो लोग देश को छोड़ कर चले गए और दूसरे देशों की नागरिकता ले ली है। उन लोगों या कंपनियों की प्रॉपर्टी को शत्रु घोषित कर दिया जाता है और सरकार उस प्रॉपर्टी की देखरेख के लिए कस्टोडियन की नियुक्ति कर देती है।

शत्रु संपत्ति अधिनियम को भारत सरकार ने 1968 में लागू किया था, जिसके अंतर्गत अभिरक्षण में शत्रु संपत्ति को रखने की सुविधा प्रदान की गई थी। केंद्र सरकार भारत में शत्रु संपत्ति के अभिरक्षण के माध्यम से देश के विभिन्न राज्‍यों में फैली शत्रु संपत्तियों को अपने अधिकार में रखती है, इसके अलावा शत्रु संपत्तियों के तौर पर चल संपत्तियों की श्रेणियां भी शामिल है।

अब तक क्या मिला? 
सरकार की रिपोर्ट बताती है दिसंबर 2015 तक जिन संपत्ति की जानकारी सरकार के पास है, उनमें मुंबई में फिक्सड डिपॉजिट, ट्रेजरी बिल और गवर्नमेंट स्टॉक के रूप में 310 करोड़ रुपए, 177 करोड़ 60 लाख रुपए का बैंक बैलेंस और 37 लाख 54 हजार रुपए की गोल्ड और सिल्वर ज्वैलरी शामिल है।

किन राज्यों में होगी तलाश ? 
हले चरण में पांच राज्यों में शत्रु संपत्ति की तलाश की जाएगी। इनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, केरल और दिल्ली शामिल हैं। इस काम के लिए 65 अधिकारियों कर्मचारियों की एक टी का गठन किया है।

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