100+ Important One Word Substitution in Hindi Meaning

सामान्य हिन्दी के अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution) हम यहां प्रस्तुत कर रहे है। सामान्य हिन्दी के यह सामग्री यूजीसी, पीसीएस, आरएएस, बी.एड, पीजीटी/ टीजीटी, एसएससी, बैंक, रेलवे, सब-इन्सपेक्टर इत्यादि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।




● दिन में कम दिखायी देता हो – दिनौंधी (UPPCS)
● जंगल की आग – दावानल (Upper Sub., Low Sub.)
● जो बहुत कठिनाई से मिलता है – दुर्लभ, दुष्प्राप्य (RAS, UPPCS)
● ऐसा अकाल कि भिक्षा देना/लेना भी कठिन हो – दुर्भिक्ष (UPPCS)
● अनुचित बात के लिए आग्रह – दुराग्रह (UPPCS, Upper Sub.)
● ज्ञान नेत्र से देखने वाला अन्धा व्यक्ति – दिव्यद्रष्टा (UPPCS)
● कठिनाई से समझने योग्य – दुर्बोधगम्य (UPPCS)
● जिसकी जीविका दान पर चलती हो – दानवृत्ति (UKPCS)
● जो देखने योग्य हो – द्रष्टव्य, दर्शनीय (UPPCS)
● जिस वर की शादी दूसरी बार हो रही हो – द्विवर (UKPCS)
● दो भिन्न भाषा-भाषियों के बीच मध्यस्थता करने वाला – द्विभाषिया (Low Sub.)

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● जिसकी धर्म में निष्ठा हो – धर्मनिष्ठ (RAS)
● जो गणना के अयोग्य हो – नगण्य (UPPCS)
● जो ईश्वर को न मानता हो -नास्तिक (UPPCS, BDO Upper Sub., BPSC, IAS)
● जो निन्दा के योग्य हो – निन्दनीय (Upper Sub.)
● जो नीचे लिखा गया है – निम्नलिखित (IAS)
● जो किसी से न डरे – निडर (UKPCS)
● जो भयभीत न होता हो – निर्भीक, निर्भय, अभय (IAS)
● मांस न खाने वाला – निरामिष (UPPCS)
● जिसके मन/हृदय में दया न हो – निर्दय, निर्दयी (Upper Sub., BDO)
● जिसके हृदय में ममता न हो – निर्मम (UPPCS, RO)
● जिसका कोई आधार न हो – निराधार (APO)
● जिसका कोई आश्रय न हो – निराश्रय (Upper Sub.)
● आकाश में विचरण करने वाला – नभचर (Low Sub.)
● जिसके विषय में मत-भेद न हो – निर्विवाद (MPPCS)
● जो नया आया हो – नवागत, आगन्तुक (UPPCS)
● जहाँ किसी बात का डर अथवा खतरा न हों – निरापद (UPPCS)
● देश के बाहर माल भेजना – निर्यात (UPPCS)
● जिसकी आशा न की गई हो – नियंत्रित (RAS)
● जहाँ आबादी न हो – निर्जन (Low Sub.)
● जो इन्द्रिय रहित हो – निरीन्द्रिय (BPSC)
● जिसका गला नीले रंग का है – नीलकंठ (Low Sub.)
● जिसका कोई अर्थ न हो – निरर्थक (UPPCS)
● जो नापा जा सके – नापनीय, नाप्य (MPPCS)
● निम्न कोटि का – निकृष्ट (Low Sub.)
● जिसे वाणी व्यक्त न कर सके – निर्वाक् (UPPCS)
● नष्ट हो जाने वाला – नष्ट प्राय (UPPCS)
● नीले रंग का कमल – नील कमल (UPPCS)
● जो शंका करने योग्य न हो – निःशंक (UPPCS)
● पृथ्वी से संबंधित या मिट्टी का बना हुआ – पार्थिव (UPPCS)
● जो देखने में प्रिय लगे – प्रियदर्शी (BPSC)
● इतिहास के युग से पूर्व का – प्रागैतिहासिक (BPSC, UPPCS)
● जिस स्त्री के पुत्र, पति दोनों हों – पुरन्ध्रि (BPSC)
● पिता से प्राप्त की हुई सम्पत्ति – पैतृक (RAS)
● पत्ते की बनी हुई कुटी – पर्णकुटी (Upper Sub.)
● किसी के निधन की वार्षिक तिथि – पुण्यतिथि (UKPCS)
● कही बात को बार-बार दुहराना – पिष्टपेषण, पुनरुक्ति (UPPCS)
● जिसके पार देखा जा सके – पारदर्शी, पादर्शक (UPPCS, IAS,  UKPCS)
● जो अपनी जन्म भूमि छोड़कर विदेश में वास करता हो/जो व्यक्ति विदेश में रहता हो – प्रवासी (UPPCS)
● दिन का पहला भाग सबेरे से दोपहर तक/दोपहर से पूर्व का समय – पूर्वाह्न (BPSC, UPPCS)
● दूसरों का उपकार/हित/भला करने वाला – परोपकारी (IAS,  Low Sub.)
● पुस्तक या लेखक की हस्तलिखित प्रति – पाण्डुलिपि (Low Sub.)
● जो दूसरे के अधीन हो – पराधीन (IAS)
● स्त्री जिसे पति ने छोड़ दिया हो – परित्यक्ता (UKPCS, UPPCS)
● जो निगाह (आँखो) से परे हो – परोक्ष, अप्रत्यक्ष (UPPCS)
● शीघ्र आग पकड़ने वाला – प्रज्वलनशील (MPPCS)
● पर्वत की ऊँचाई आदि का पता लगाने वाला अभियान दल – पर्वतारोही दल (MPPCS)
● एक मतवाद, जिसमें जीवन की सच्चाई और कठिनाइयों से भागने की प्रवृत्ति हो – पलायनवाद (MPPCS)
● लौटकर आया हुआ – प्रत्यावर्ती (UPPCS)
● जिस पर मुकदमा चल रहा हो/जो दायर मुकदमें का प्रतिवाद (बचाव) करे – प्रतिवादी (Low Sub., IAS,  UPPCS)
● ग्रन्थ के वे बचे हुए अंश जो प्रायः अन्त में जोड़े जाते हैं? – परिशिष्ट (IAS)
● रात्रि का प्रथम प्रहर/रात्रि के पूर्व भाग का समय – प्रदोष (BPSC)
● प्रयत्न करना जिसका स्वभाव हो – प्रयत्नशील (APO)
● जो केवल फल खाकर रहता हो – फलाहारी (IAS)
● बहुत सी भाषाओं को जानने वाला/जो एक से अधिक भाषाएँ जानता हो – बहुभाषाविद्, बहुभाषी (UPPCS, Low Sub., UKPCS)
● जो आगे की बात सोचता है – भविष्यचेत्ता (MPPCS)
● जो भारत में रहता हो – भारतीय, भारतवासी (IAS)
● भूगर्भ विज्ञान का जानकार/जिसको भूमि के अन्दर की जानकारी हो – भूगर्भवेत्ता, भूगर्भशास्त्री (UKPCS)
● जो भू (भूमि) को धारण करता है – भूधर (UPPCS)
● जो पूर्व में था या हुआ था पर अभी नहीं है – भूतपूर्व (UPPCS)
● दोपहर का समय – मध्याह्न (IAS)
● जिसे मोक्ष प्राप्त करने की इच्छा हो – मुमुक्ष (UKPCS, RAS, Upper Sub., UPPCS, IAS)
● मन, वचन और कार्य से – मनसा-वाचा-कर्मणा (Upper Sub.)
● जो कम खर्च करने वाला हो – मितव्ययी, कंजूस (UPPCS, APO)
● जिसने मृत्यु को जीत लिया हो/जिसने मृत्यु पर विजय पाई हो – मृत्युंजय (APO, UPPCS)
● थोड़ा और नपा-तुला भोजन करने वाला – मिताहारी (APO)
● किसी बात के मर्म (गूढ़ रहस्य) को जानने वाला/मन की बात जानने वाला – मर्मज्ञ (UPPCS)
● प्रिय वचन बोलने वाली स्त्री – मृदुभाषिणी (UPPCS)
● जो कम बोलने वाला हो – मितभाषी (Low Sub., UPPCS, IAS)
● जो मृत्यु के समीप हो – मरणासन्न (UPPCS)
● जो कम जानता है – मन्दबुद्धि (MPPCS)
● जो अपने मार्ग से भटक गया हो – मार्गभ्रमित (IAS)
● अपनी शक्ति भर – यथाशक्ति (UPPCS)
● जहाँ तक और जितना संभव हो – यथासंभव (APO)
● जिसने यश प्राप्त किया हो/जिसका यश चारों ओर फैल गया हो – यशस्वी (APO)
● जो युद्ध में स्थिर रहता हो – युधिष्ठिर (UPPCS, Low Sub., RAS)
● जहाँ नाटक खेला जाता है – रंगमंच (IAS)
● जो बात वर्णन के परे (बाहर) हो – वर्णनातीत (IAS)
● विष्णु सम्बंधी या उस संप्रदाय के नियमों पर चलने वाला – वैष्णव (Low Sub.)
● अनुचित यौन सम्बन्ध रखने वाला – व्यभिचारी (UPPCS)
● विभिन्न प्रकार के विवादों में फँसा हुआ – विवादास्पद (RAS)
● जो विधि/कानून की दृष्टि से ठीक/मान्य हो – वैध (Low Sub.)
● किसी विषय का, जिसको विशेष ज्ञान हो – विशेषज्ञ (MPPCS)
● जिस स्त्री का पति जीवित न हो – विधवा (UPPCS, BPSC)
● जिस पुरुष की पत्नी मर चुकी हो – विधुर (Upper Sub.)
● किसी मामले के खिलाफ दिया गया मत – विमति, टिप्पणी (RAS)
● वाणी का विकार – वाड्.मय (Low Sub.)
● काम के लिए अनुपयुक्त समय – वृथासमय (BPSC)
● दूसरों के कार्य में विघ्न डालने वाला – विघ्नकर, विघ्नकर्ता (MPPCS)
● विदेश में रहने वाला – विदेशी (UPPCS)
● जो व्याकरण को जानने वाला हो – वैयाकरण (BPSC, UPPCS, Low Sub.)
● जो व्यक्ति अधिक बोलता हो – वाचाल (RO, MPPCS, Upper Sub., UPPCS, Low Sub.)
● जो कानून के अनुकूल हो – विधि-सम्मत (UPPCS)
● वनस्पति का आहार करने वाला – वनस्पतत्याहारी (UPPCS)
● जिस पर विश्वास किया जा सके – विश्वसनीय, विश्वासपात्र (UPPCS)
● जिसका कोई अंग बेकार हो – विकलांग, अपांग (UPPCS)
● सौ वस्तुओं का संग्रह – शतक (RAS)
● सौ वर्षों का समूह, अवधि या समय – शतवर्ष, शताब्दी (Low Sub.)
● सदैव रहने वाला – शाश्वत्, अनाद्यन्त (RAS, UPPCS)
● जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता – शब्दातीत (UPPCS)
● जिसके सिर पर चन्द्रमा हो – शशिधर (UPPCS)
● जो सदा दूसरों पर संदेह करता हो – शंकालु (UPSI)
● समान रूप से ठण्डा और गरम – शीतोष्ण (UPPCS)
● वह जिसका शोषण किया जाय – शोषित (UKPCS)
● जहाँ सेना रहती हो – सैन्यवास (Low Sub.)
● जो सर्वत्र व्याप्त हो – सर्वव्यापी (UPPCS)
● जो सबको एक-सा समझता हो – समदर्शी (Upper Sub.)
● जो सब कुछ जानता हो – सर्वज्ञ (UPPCS, MPPCS, RO)
● जिकसी सीमा न हो – सीमातीत, असीमित (IAS,  UPPCS)
● जो पढ़ना लिखना जानता हो/जिसे अक्षर-ज्ञान हो – साक्षर (UPPCS, Upper Sub.)
● जिस स्त्री का पति जीवित हो – सधवा, सौभाग्यवती (RO)
● जो असत्य न बोले/सत्य बोलने वाला – सत्यावादी (Low Sub., RAS)
● अच्छे आचरण वाला सदाचारी (BPSC)
● जो आसानी से प्राप्त किया जा सके – सुग्राह्य (UPPCS)
● जहाँ खाना मुफ्त में मिलता है – सदाव्रत, लंगर (UPPCS)
● अपनी इच्छा के अनुसार आचरण करने वाला – स्वेच्छाचारी (APO)
● स्त्री के वश में रहने वाला/जिसका स्वभाव स्त्रियों जैसा हो – स्त्रैण (UPPCS)
● दो धाराओं या नदियों के मिलन का स्थान – संगम (Upper Sub., IAS)
● बहुत पढ़ी-लिखी स्त्री – सुशिक्षिता (Upper Sub.)
● जो हमेशा/निरंतर रहने वाला हो – स्थायी, शाश्वत (UPPCS)
● अपनी इच्छा से दूसरों की सेवा करने वाला – स्वयंसेवक (Upper Sub.)
● जो स्वयं भोजन बनाकर खाता हो – स्वयंपाकी (RAS)
● जो सव्य (बायें) हाथ से काम करता हो – सव्यसाची (UKPCS)
● जो एक ही माता के उदर (पेट) से उत्पन्न हुए हों – सहोदर (APO)
● संदेश ले जाने वाला – संदेशवाहक (UPPCS)
● बहुत पढ़ी-लिखी स्त्री – सुशिक्षिता (Upper Sub.)
● अच्छी आँखो वाली स्त्री – सुनयना (APO, Upper Sub.,)
● किसी काम में दूसरे से आगे बढ़ जाने की प्रबल इच्छा – स्पर्द्धा (RAS)
● जो स्मरण रखने योग्य हो – स्मरणीय (UPPCS, APO)
● जो आप से आप उत्पन्न हुआ हो – स्वयंभू (UPPCS)
● जो संसार का संहार करता हो – संहारक (IAS)
● जिसकी ग्रीवा सुन्दर हो – सुग्रीव (UPPCS, APO)
● पसीने से उत्पन्न होने वाला – स्वेदज (UKPCS)
● भला या हित चाहने वाला – हितैषी (BPSC)
● मिठाई बनाकर बेचने वाला – हलवाई (IAS)
● जो क्षमा पाने योग्य है – क्षम्य (UPPCS, APO)
● जहाँ पृथ्वी और आकाश मिलते दिखायी पड़े – क्षितिज (RAS, IAS)
● भूत, भविष्य एवं वर्तमान को देखने वाला – त्रिकालदर्शी (RAS)

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