सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के लोकायुक्त नियुक्ति किया


सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसबंर को ऐतिहासिक पहल करते हुए स्वयं ही उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस वीरेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के नए लोकायुक्त बनाए गए हैं। चयन समिति के सदस्यों के बीच कोई नाम फाइनल नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस वीरेंद्र सिंह के नाम पर मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया। बता दें कि ऐसी पहली बार हुआ है जब कोर्ट ने खुद ही किसी राज्य का लोकायुक्त नियुक्त किया है।

याद रहे कि उत्तर प्रदेश के नए लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई समय सीमा की


समाप्ति की उल्टी गिनती शुरू होने के बीच इस सिलसिले में चयन समिति की 16 दिसबंर को हुई बैठक भी बेनतीजा रही थी। इसके साथ ही लगभग निश्चित हो गया था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा में नया लोकायुक्त नियुक्त नहीं कर सकेगी।

लोकायुक्त के चयन की तीन सदस्यीय समिति में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में लोकायुक्त का मामला पिछले एक साल से लटका हुआ था और इस पर कोई सहमति नहीं बन पा रही थी।

जस्टिस वीरेंद्र सिंह : एक परिचय
- जस्टिस वीरेंद्र सिंह लोकायुक्त बनने से पहले यूपी उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष थे। उनका यहां कार्यकाल 3 जनवरी, 2016 तक था।
- जस्टिस वीरेंद्र सिंह का जन्म 4 जनवरी, 1949 को हुआ था।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में इनकी नियुक्ति 13 अप्रैल, 2009 को हुई थी।
- 13 अप्रैल, 2011 तक वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में रहे।
- जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने मेरठ यूनिवर्सिटी से 1972 में लॉ में ग्रैजुएशन किया।
- साल 1977 में पीसीएस (जे) में अपॉइंट हुए और 1989 में हायर ज्यूडिशियल सर्विस के लिए प्रमोट हुए।
- 2005 में डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज के रूप में प्रमोट हुए।
- 13 अप्रैल, 2009 में हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने।
- 24 दिसंबर, 2010 को इन्होंने पर्मानेंट जज की शपथ ली थी।

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