भारत पाकिस्तान संबंध पर नवीनतम जानकारी


भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 'हार्ट आॅफ एशिया' सम्मेलन में भाग लेने 9 दिसंबर, 2015 को पाकिस्तान पहुंची। जिसका उद्घाटन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने किया। इसमें सुषमा स्वराज के अलावा अन्य एशियाई देशों के विदेश मंत्री भी शामिल हुए। इससे आतंकवाद रुकने पर ही वार्ता को लेकर अड़े भारत और पाकिस्तान के बीच रुकी वार्ता फिर से बहाल होगी। दोनों देश आने वाले दिनों में विभिन्न स्तरों पर समग्र वार्ता शुरू करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अगले साल इस्लामाबाद में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इससे पहले जनवरी 2004 में आयोजित सा​र्क शिखर सम्मेलन में भाग लेने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान गए थे।

पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के साथ भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त बयान में भारत-पाक संबंधी पांच बड़ी बातें कही गयी–
1. दोनों पक्ष व्यापक द्विपीक्षय संवाद के लिए तैयार हो गए हैं।
2. दोनों देशों के विदेश सचिव इसकी तारीख और रूपरेखा तय करेंगे।
3. दोनों पक्ष जम्मू कश्मीर, सियाचिन, सर क्रीक, तुलबुल परियोजना, आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग, चरमपंथ के खिलाफ कार्रवाई, मादक पदार्थों की रोकथाम और मानवीय मुद्दों पर संवाद करेंगे।
4. दोनों पक्षों ने आतंकवाद की आलोचना की है और बैंकॉक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मुलाकात को सफल बताया।
5. भारतीय पक्ष को भरोसा दिलाया गया है कि मुंबई इमलों के मामले में जारी अदालती कार्यवाही जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।


प्रधानमंत्रियों का पाक दौरें पर एक नजर
जुलाई 1953 : तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पाक का दौरा किया। इस दौर का मकसद कश्मीर सहित सभी मसलों का समाधान निकालना था।
सितंबर 1960 : नेहरू ने दूसरी बार पाक की यात्रा की। इस दौर में सिंधु जल समझौता हुआ। हालांकि, इस समझौते को लेकर नेहरू की पार्टी के भीतर ही सवाल उठे थे।
दिंसबर 1988 : नेहरू के बाद करीब तीन दशक तक किसी भी भारतीय पीएम ने पाक का दौरा नहीं किया। इन्हीं तीन दशकों में पाक के साथ 1965 और 1971 का युद्ध हुआ। दिसंबर 1988 में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने पाक का दौरा किया। वह भी इस्लामाबाद में हो रहे सार्क सम्मेलन में भाग लेने के लिए गए
जुलाई 1989 : तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने एक बार फिर पाक का दौरा किया, लेकिन इसके कुछ खास नतीजे नहीं निकले। तब राजीव और बेनजीर की राजनीतिक स्थिति घरेलू मोर्चे पर कमजोर हो चुकी थी।
फरवरी 1999 : राजीव की यात्रा के करीब एक दशक बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाक का दौरा किया। उन्होंने दिल्ली-लाहौर बस सेवा की शुरुआत की। सीमा पर तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ ने उनका स्वागत किया। लाहौर घोषणा पत्र जारी किया गया, लेकिन इसके तुरंत बाद कारगिल युद्ध हो गया।
जनवरी 2004 : 12वें सार्क शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए वाजपेयी ने एक बार फिर पाक की यात्रा की। इस दौर में ही पाक के साथ समग्र वार्ता की शुरुआत हुई लेकिन मुंबई पर 2008 में 26/11 को हुए हमले के बाद तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने वार्ता स्थगित कर दी।

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