सऊदी अरब में पहली बार 5 महिलाएं निर्वाचित

सऊदी अरब में पहली बार मतदान का अधिकार पाने वाली ​महिलाओं ने इतिहास रचा है। यहां के स्थानीय निकाय चुनाव में कम से कम 17 महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर राजनीति में कदम रखा है। सऊदी अरब के चुनाव आयोग के अध्यक्ष ओसामा अल-बार ने 13 दिसंबर को सबसे पहले सलमा बिंत हिजाब अल ओतैबी की जीत का एलान किया। इस तरह सलमा बिंत हिजाब अल ओतैबी मुस्लिमों के पवित्र स्थान मक्का शहर की एक नगरपालिका सीट से चुनाव जीतकर सऊदी अरब की पहली महिला निर्वाचित प्रतिनिधि बन गई हैं।

सऊदी अरब में इस चुनाव में पहली बार महिलाओं को मताधिकार इस्तेमाल करने और जन प्रतिनिधि बनने का अधिकार मिला। नगरपालिका परिषद की 2106 सीटों पर लड़ रहे कुल 6,440 उम्मीदवारों में 900 से ज्यादा महिलाएं थीं। देश में पहले स्थानीय निकाय चुनाव 2005 में हुआ था। तब सिर्फ पुरुष ही इसके लिए खड़े हो सकते थे और वोट डाल सकते थे।

याद रहे, कि सऊदी अरब में नगर परिषद् के लिए ही चुनाव होते हैं और यह तीसरा मौका था, जब निकाय चुनाव कराए गए। सऊदी में दो तिहाई नगर परिषदों में प्रतिनिधियों की नियुक्ति सुल्तान द्वारा ही की जाती है।

सऊदी अरब में सार्वजनिक सुविधाओं में लैंगिक विलगाव लागू है। इस कारण अपने चुनाव प्रचार के दौरान कोई महिला उम्मीदवार पुरुष मतदाताओं से संपर्क नहीं कर सकती। अत्याधुनिक साधनों-सुविधाओं से लैस सऊदी अरब में महिलाओं पर अनेक पाबंदियां अब भी लागू हैं।

यहां राजशाही है, जो महिलाओं को वाहन चलाने की इजाजत नहीं देती। उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर खुद को सिर से पैर तक ढक कर रखना होता है। वे परिवार के पुरुषों की अनुमति के बिना यात्रा, काम या शादी नहीं कर सकतीं। यहां महिलाओं के पक्ष में बदलाव की रफ्तार बेहद धीमी है। चार साल पहले जब देश में दूसरी बार कांउसिल चुनाव हुआ था, तभी सऊदी शासन ने एलान किया था कि 2015 के नगरपालिका चुनाव में महिलाएं भाग ले सकेंगी।

निकाय चुनावों पर एक नजर
-978 महिला प्रत्याशी खड़ी थीं नगरपालिका चुनाव में
-1.30 लाख महिलाओं ने मतदान करने के लिए पंजीकरण कराया था
-5,938 पुरुष प्रत्याशी भी खड़े थे चुनाव मैदान में
-21006 सीटों के लिए बीते शनिवार मतदान हुआ था
-1050 सीटों पर सऊदी शाह द्वारा नामित व्यक्ति होते हैं प्रतिनिधि

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