26 नवंबर-संविधान दिवस घोषित हुआ

आज हमारे देश का पहला संविधान दिवस है। 26 जनवरी, 1950 को गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित होने के 65 साल बाद देश पहली बार इस साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाएगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 26 नवंबर को हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है।

याद रहे, भारत का संविधान 166 बैठकों के बाद 2 साल 11 माह 18 दिन में मूर्तरूप ले पाया था। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने इसे मंजूरी दी और 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ। 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं और अब 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण तथ्य–
1. भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है।
2. कैबिनेट समिति की सिफारिश पर भारतीय संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा का गठन जुलाई 1946 में हुआ था।
3. 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक काउंसिल चैंबर के पुस्तकालय में हुईसच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी सभापति चुना गया।
4. पहली बैठक में 2010 सदस्य उपस्थित थे। मुस्लिम लीग ने इसका बहिष्कार किया और पाकिस्तान के लिए अलग संविधान की मांग की। हैदराबाद रियासत के प्रतिनिधि भी नहीं सम्मलित हुए।
5. संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या 389 थी इसमें 299 ब्रिटिश प्रांत के प्रतिनिधि, 04 चीफ कमिश्नर क्षेत्र और 93 देशी रियासतों के प्रतिनिधि थे।
6. 11 दिसंबर 1946 को डा. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी सभापति चुने गए। डा. भीमराव अंबेडकर संविधान निर्मात्री समिति के अध्यक्ष बने।
7. इस संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन मे कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी।
8. संविधान को 26 नवंबर, 1949 को स्वीकार किया गया था लेकिन वह 26 जनवरी, 1950 से लागू हुआ।
9. संविधान अब 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं।
10. संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता को मंत्रिपरिषद् होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा।
11. वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है।
12. भारत के संविधान के निर्माण में डॉ भीमराव अम्बेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें 'संविधान का निर्माता' कहा जाता है।
13. भारत का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है। यह ना तो किसी धर्म को बढावा देता है, ना ही किसी से भेदभाव करता है।
14. भारतीय संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्षण है, राज्य की शक्तियां केंद्रीय तथा राज्य सरकारों मे विभाजित होती हैं। दोनों सत्ताएं एक-दूसरे के अधीन नहीं होती है, वे संविधान से उत्पन्न तथा नियंत्रित होती हैं।
15. राज्य अपना पृथक संविधान नही रख सकते है, केवल एक ही संविधान केन्द्र तथा राज्य दोनो पर लागू होता है।
16. भारत मे द्वैध नागरिकता नहीं है। केवल भारतीय नागरिकता है। जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबर का दर्जा और अवसर देता है।
17. भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित तथा विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के माध्यम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है।
18. संविधान की प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह 'हम भारत के लोग', इस वाक्य से प्रारम्भ होती है।
19.  प्रत्‍येक राज्‍य में एक विधान सभा है। जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में एक ऊपरी सदन है जिसे विधान परिषद् कहा जाता है। राज्‍यपाल, राज्‍य का प्रमुख है।
20. 'समाजवादी' शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह अपने सभी नागरिकों के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करता है।

उद्देश्य प्रस्ताव के मुख्य अंश–
● भारत पूर्ण संप्रभुता संपन्न गणराज्य होगा, जो अपना संविधान बनाएगा
● भारत संघ में ऐसे सभी क्षेत्र शामिल होंगे, जो ब्रिटिश भारत में है या देशी रियासतों में हैं या इन दोनों से बाहर ऐसे क्षेत्र है जो प्रभुता संपन्न भारत संघ का हिस्सा बनना चाहते हैं
● भारत संघ तथा उसकी इकाइयों में राजशक्ति का मूल स्रोत जनता होगी
● भारत के नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय, पद, अवसर और कानून की समानता, विचार, भाषण, विश्वास, व्यवसाय, संघ निर्माण और कार्य का ​स्वतंत्रता, कानून तथा सार्वजनिक नैतिकता के अधीन प्राप्त होगी।
● अल्पसंख्यक वर्ग, पिछड़ी जातियों, कबायली जातियों के हितों की समुचित रक्षा की जाएगी।

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