एंगस डिएटन को अर्थशास्त्र का नोबल मिला

स्कॉटलैंड में जन्मे ब्रिटेन के 69 वर्षीय अर्थशास्त्री एंगस डिएटन को उपभोग, गरीब और कल्याण के विषय पर उनके शोधकार्यों के लिए साल 2015 का अर्थशास्त्र के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंस ने कहा कि डीटॉन ने यह पुरस्कार ‘खपत, गरीबी और कल्याण के अपने विश्लेषण’ के लिए जीता है। एकेडमी ने कहा कि डीटॉन को जिस काम के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा वह तीन प्रमुख सवालों के जवाब देता है। पहला, किस प्रकार उपभोक्ता विभिन्न वस्तुओं पर होने वाले खर्च को वितरित करते हैं। दूसरा, समाज की आय का कितना हिस्सा खर्च होता है और कितना बचता है और तीसरा कि किस प्रकार हम सबसे बेहतर तरीके से कल्याण और गरीबी का विश्लेषण कर सकते हैं।

एंगस डिएटन का जन्म 1945 में एडिनबरा में हुआ और इस समय वह अमेरिका के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं।

अकादमी का कहना है कि एंगस डिएटन का काम तीन केंद्रीय प्रश्नों के इर्द गिर्द केंद्रित है जिनमें उपभोक्ता अपने खर्च को अलग अलग समानों पर किस तरह बांटते हैं, समाज अपनी आय का कितना खर्च करता है और कितना बचाता है तथा हम कल्याण व गरीबी का श्रेष्ठ आकलन व विश्लेषण कैसे करेंगे। पिछले साल, फ्रांस के अर्थशास्त्री जीन तिरोल ने बाजार की शक्ति और नियमन पर अपने शोध के लिए यह पुरस्कार जीता था।

1968 में शुरू हुआ अर्थशास्‍त्र का नोबेल
अर्थशास्त्र में नोबल पुरस्कार मूल नोबल पुरस्कारों में शामिल नहीं था। स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने अल्फ्रेड नोबल की स्मृति में इसे 1968 में शुरू किया। डिएटन को स्वीडन के वैज्ञानिक और परोपकारी एल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में समारोह पूर्वक स्वीडन के 80 लाख क्रोनर (लगभग 9,50,000 अमेरिकी डॉलर) का यह पुरस्कार दिया जाएगा।

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