100+ महाराणा प्रताप संबंधी रोचक तथ्य - घोड़ा, भाला, तलवार, पत्नियां आदि जानकारी

maharana pratap facts in hindi

वीरता और देश​भक्ति् के प्रतीक महाराणा प्रताप का जन्म उदयपुर नगर में हुआ। ये राणा सांगा के पुत्र महाराणा उदयसिंह के सुपुत्र थे। गौरव, सम्मान, स्वाभिमान व स्वतंत्रता के संस्कार इन्हें विरासत में मिले थे। सन 1572 ई. में प्रताप के शासक बनने के समय संकट की स्थिति थी। प्रताप को अकबर की सम्पन्न मुगल सेना व मानसिंह की राजपूत सेना से लोहा लेना पड़ा था। महाराणा प्रताप ने छापामार युद्धनीति अपनाकर बीस वर्ष तक मुगलों से संघर्ष किया। इन्हें परिवार सहित जंगलों में भटककर घास की रोटी तक खानी पड़ी। इन्होंने प्रतिज्ञा की कि जब तक चित्तौड़ पर अधिकार नहीं हो जाएगा; तब तक मैं जमीन पर सोऊंगा और पत्तलों पर भोजन करूंगा। आइये जानते है महाराणा प्रताप के जीवन से संबंधित रोचक तथ्य–



● महाराणा प्रताप को भारत का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी भी कहा जाता है।
● प्रताप मेवाड़ में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे।
● महाराणा प्रताप का जन्म मेवाड़ में 9 मई 1540 को हुआ था।
● महाराणा प्रताप का पूरा नाम महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया था। इनके पिता का नाम राणा उदय सिंह था।
● महाराणा प्रताप के बचपन का नाम “कीका” था।
● प्रताप का वजन 110 किलो और ऊँचाई 7 फीट 5 इंच थी।

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● महाराणा प्रताप के भाला का वजन 81 किलो और छाती के कवच का वजन 72 किलो था। उनका भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन कुल मिलाकर 208 किलो था।
● महाराणा प्रताप की 11 पत्नियां थीं, जिसमें से महारानी अजबदे पंवार उनकी पसंदीदा थीं।
● मेवाड़ राज्य के भील जाति के लोग महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे।
● महाराणा प्रताप ने मायरा की गुफा में घास की रोटी खाकर बहुत दिन गुजारे थे परन्तु अकबर की गुलामी स्वीकार नहीं की।
● प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।


● महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम चेतक था। जो प्रताप की तरह काफी बहादुर भी था।
● एक बार युद्ध में चेतक ने अपना पैर हाथी के सिर पर रख दिया था। हर युद्ध में महाराणा का साथ निभाते हुए चेतक एक बार घायल महाराणा प्रताप को लेकर वह 26 फीट लंबे नाले के ऊपर से कूद गया था।
● अकबर के साथ युद्ध के दौरान प्रताप के घोड़े चेतक के सिर पर हाथी का मुखोटा लगाया गया था। जिससे युद्ध मैदान में दुश्मनों के हाथियों को भ्रमित किया जा सके।
● चित्तौड़ की हल्दी घाटी में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की समाधि बनी हुई है।
● जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहां आज भी मंदिर भी बना हुआ है।
● महाराणा प्रताप निहत्थे दुश्मन के लिए भी एक तलवार रखते थे उनके पास दो तलवारें होती थी।
● अकबर के पास लाखो सैनिक थे और महाराणा प्रताप के पास हजारों फिर भी अकबर को रात में महाराणा प्रताप का डर सताता था।
● हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था।

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● हल्दीघाटी का युद्ध दुनिया के सबसे विनाशकारी युद्धों में गिना जाता है। इतिहासकार के अनुसार यह महाभारत युद्ध की तरह हैं।
● ऐसा माना जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में न तो अकबर जीत सका और न ही राणा हारे। मुगलों के पास सैन्य शक्ति अधिक थी तो राणा प्रताप के पास जुझारू शक्ति की कोई कमी नहीं थी।
● हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे और अकबर के पास 85000 सैनिक। इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। वह अपने भाई द्वारा विश्वासघात के कारण यह युद्ध हार गया।
● हकीम खाँ सूरी, हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लड़ने वाले एकमात्र मुस्लिम सरदार थे।
● हल्दीघाटी के युद्ध में मुग़ल प्रतिद्वन्दी बहलोल खान के महाराणा प्रताप जी ने उसके घोड़े सहित अपनी तलवार की धार से बीच में से दो टुकड़े कर दिए थे।
● हल्दीघाटी के युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था। भील सेना के सरदार राणा पूंजा भील थे।


● महाराणा प्रताप के विरुद्ध हल्दीघाटी में पराजित होने के बाद स्वयं अकबर ने जून से दिसंबर 1576 तक तीन बार विशाल सेना के साथ महाराणा पर आक्रमण किए, लेकिन प्रताप को खोज नहीं पाए, बल्कि महाराणा के जाल में फंसकर पानी भोजन के अभाव में सेना भी मारी गई।
● 30 सालों तक प्रयास के बाद भी अकबर, प्रताप को बंदी न बना सका।
● ऐसी मान्यता है कि प्रताप का सेनापति सिर कटने के बाद भी युद्ध लड़ता रहा।
● हल्दीघाटी युद्ध को 300 साल हो चुके हैं, पर आज भी वहां के युद्ध मैदान में तलवारे पाई जाती हैं। आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था।
● इतिहासकार के अनुसार, अकबर ने महाराणा प्रताप को युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने के लिए 6 शान्ति दूतों को भेजा था और अपना राज्य उसके आधिन करने के लिए कहा था। लेकिन महाराणा प्रताप उसका यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और कहा राजपूत योद्धा मर जाएगा पर गुलामी स्वीकार नहीं करेगा।

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● अकबर ने एक बार कहा था की अगर महाराणा प्रताप और जयमल मेड़तिया मेरे साथ होते तो हम विश्व विजेता बन जाते।
● मरने से पहले महाराणा प्रतापजी ने अपना खोया हुआ 85% मेवाड फिर से जीत लिया था। सोने चांदी और महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे।
● महाराणा प्रताप की मृत्यु 29 जनवरी 1597 को शिकार दुर्घटना में जख्मी होने की वजह से हुई थी। प्रताप की मौत की खबर सुनकर अकबर भी रो पड़ा था।
● आज भी महाराणा प्रताप की तलवार, कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

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