भारतीय रिजर्व बैंक के 25वे गवर्नर बनें शक्तिकांत दास

केन्द्र सरकार ने 11 दिसम्बर 2018 को शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का नया 25वां गवर्नर नियुक्त किया। उनका गवर्नर पद पर कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। बता दें कि उर्जित पटेल ने 10 दिसम्बर को अचानक गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था। आर्थिक मामलों के विभाग के पूर्व सचिव शक्तिकांत दास 1980 बैच के तमिलनाडु काडर के आईएएस अधिकारी हैं। वह वित्त आयोग के सदस्य रह चुके हैं। उनकी पहचान एक ऐसे नौकरशाह के तौर पर है जिन्होंने केन्द्र में तीन अलग अलग वित्त मंत्रियों के साथ सहजता के साथ काम किया। शक्तिकांत दास को कार्य-क्रियान्वयन में दक्ष और टीम का व्यक्ति माना जाना जाता है।

सनद रहे कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भारत का केन्द्रीय बैंक है। जिसकी स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक की संरचना में एक गर्वनर और चार डिप्टी गवर्नरों होते है। रिज़र्व बैंक का केन्द्रीय कार्यालय प्रारम्भ में कलकत्ता में स्थापित किया गया था जिसे 1937 में स्थायी रूप से बम्बई में स्थानान्तरित कर दिया गया। केन्द्रीय कार्यालय वह कार्यालय है जहाँ गवर्नर बैठते हैं और नीतियाँ निर्धारित की जाती हैं। वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikant Das) के अलावा चार डिप्टी गवर्नर एम.के. जैन, बी पी कानूनगो, विराल वी आचार्य और एन.एस. विश्वनाथन भी है।


शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) : एक परिचय
● शक्तिकांत दास 1980 बैच के तमिलनाडु काडर के आईएएस अधिकारी हैं। दास दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नात्कोत्तर हैं। वे अपने 37 वर्ष के लंबे कार्यकाल में केंद्र और राज्य में ज्यादातर आर्थिक एवं वित्त विभागों में ही तैनात रहे।

● उन्हें वित्त मंत्रालय में पहली बार वर्ष 2008 में संयुक्त सचिव के तौर नियुक्त किया गया, जब पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे। इसके बाद संप्रग सरकार में जब प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला तब भी वह इसी मंत्रालय में रहे और पहले संयुक्त सचिव के तौर पर और फिर अतिरिक्त सचिव के रूप में लगातार पांच साल वह बजट बनाने की टीम का हिस्सा रहे। यह कार्यकाल चिदंबरम और मुखर्जी दोनों के समय रहा।

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● शक्तिकांत दास को दिसंबर 2013 में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में सचिव बनाया गया लेकिन मई 2014 में केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें वापस वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव बनाया गया।

● उन्होंने माल एवं सेवाकर को लागू करने में आम सहमति बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

● सितंबर 2015 में शक्तिकांत दास आर्थिक मामले विभाग में स्थानांतरित किये गये, जहां उन्होंने नोटबंदी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नोटबंदी के बड़े झटके के दौरान सरकार का बचाव करते हुये उन्होंने न केवल आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई बल्कि अर्थव्यवस्था में 500 और 2,000 रुपये का नया नोट जारी करने और इसकी आपूर्ति बढ़ाने में भी अग्रणी भूमिका निभाई।


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