यूनेस्को द्वारा घोषित भारत के 37 विश्व धरोहर स्थल

यूनेस्को (UNESCO – United Nations Educational Scientific and Cultural Organisation) ने मुम्बई की 'विक्टोरियन गौथिक' व 'आर्ट डेको' वस्तुशिल्प से बनी 19वीं व 20वीं सदी की कलात्मक इमारतों को विश्व विरासत समिति की बहरीन में मनामा में 24 जून से 4 जुलाई, 2018 की सालाना बैठक में ​शामिल करने की घोषणा की। इससे विश्व विरासत सूची में शामिल भारतीय स्थलों की संख्या अब 37 हो गई है। इनमें 29 सांस्कृतिक स्थलों की श्रेणी में हैं, जबकि 7 स्थल प्राकृतिक स्थलों की श्रेणी में हैं और एक मिश्रित स्थल हैं। यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल 37 भारतीय स्थलों में सर्वाधिक 5 महाराष्ट्र के हैं।



युनेस्को विश्व विरासत स्थल किसे कहते है?
युनेस्को विश्व विरासत स्थल ऐसे खास स्थानों (जैसे वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन, या शहर इत्यादि) को कहा जाता है, जो विश्व विरासत स्थल समिति द्वारा चयनित होते हैं; और यही समिति इन स्थलों की देखरेख युनेस्को के तत्वाधान में करती है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्व के ऐसे स्थलों को चयनित एवं संरक्षित करना होता है जो विश्व संस्कृति की दृष्टि से मानवता के लिए  महत्वपूर्ण हैं। कुछ खास परिस्थितियों में ऐसे स्थलों को इस समिति द्वारा आर्थिक सहायता भी दी जाती है।

नाम – आगरा का लाल किला
स्थान – आगरा (उत्तर प्रदेश)
घोषणा वर्ष – 1983
महत्वपूर्ण तथ्य – आगरा का किला मुगल बादशाह अकबर ने बनवाया था। इस किले का निर्माण हिन्दू व इस्लामिक वास्तु शैलियों को मिलाकर किया गया है। ड्रेगन, पक्षी और अन्य कई जीवित चीजों को इस किले में दर्शाया गया है।

नाम – अजन्ता की गुफाएँ
स्थान – औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
घोषणा वर्ष – 1983
महत्वपूर्ण तथ्य – अजन्ता की गुफाएँ पाषाट कट स्थापत्य गुफाएँ हैं। यहाँ बौद्ध धर्म से सम्बन्धित चित्रण एवं शिल्पकारी के उत्कृष्ट नमूने मिलते हैं। इसके साथ ही सजीव चित्रण भी मिलते हैं।

नाम – एलोरा की गुफाएँ
स्थान – ओरंगाबाद (महाराष्ट्र)
घोषणा वर्ष – 1983
महत्वपूर्ण तथ्य – एलोरा की गुफाएँ भारतीय पाषाण शिल्प स्थापत्य कला का सार है। यहाँ 34 गुफाएँ (12 बौद्ध गुफाएँ, 17 हिन्दू गुफाएँ और 5 जैन गुफाएँ) हैं। यह स्थल अद्वितीय कलात्मक सृजन और तकनीकी उत्कृष्टता का नजारा है।


नाम – ताजमहल
स्थान – आगरा (उत्तर प्रदेश)
घोषणा पत्र – 1983
महत्वपूर्ण तथ्य – ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में करवाया था। ताजमहल मुगल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तु शैली फारसी, तुर्की, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है।

नाम – महाबलीपुरम के स्मारक
स्थान – महाबलीपुरम (तमिलनाडु)
घोषणा वर्ष – 1984
महत्वपूर्ण तथ्य – महाबलीपुरम के स्मारकों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बाँटा जाता है–रथ, मधण्डल, गुफा मन्दिर, संरचनात्मक मन्दिर और रॉक। ये स्मारक प्रागौतिहासिक वास्तु प्रतिभा का एक उदाहरण हैं तथा ये मौलिक परम्पराओं तथा सभ्यताओं का अनूठा मिश्रण है।

नाम – कोणार्क का सूर्य मन्दिर
स्थान पुरी (ओडिशा)
घोषणा वर्ष – 1984
महत्वपूर्ण तथ्य – यह मन्दिर मध्यकालीन वास्तु कला का अद्भभुत उदाहरण है। यह मन्दिर सूर्य देव को समर्पित है तथा एक रथ के आकार में बना हुआ है, जिसमें कुल 24 चक्र हैं और 7 घोड़े इस रथ को खींच रहे हैं।

नाम – काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
स्थान – गोलाघाट (असोम)
घोषणा वर्ष – 1985
महत्वपूर्ण तथ्य – काजीरंगा राष्ट्रीय उद्वाान एक सींग वाले गैंडे के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह लगभग 429,93 वर्ग किमी, क्षेत्रफल वाला एक बड़ा उद्वान है।

नाम – केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान
स्थान – राजस्थान
घोषणा वर्ष – 1985
महत्वपूर्ण तथ्य – केवलादेव राष्ट्रीय उद्वान एक संरक्षित पक्षी अभ्यारण्य है, जिसमें हजारों की संख्या मे दुर्लभ और विलुप्त जाति के पक्षी पाए जाते हैं, जैसे-साइबेरिया से आए सारस। यहाँ लगभग 230 प्रजाति के पक्षियों ने अपना घर बनाया हुआ है।

नाम – मानस राष्ट्रीय उद्यान
स्थान – असोम
घोषणा वर्ष – 1985
महत्वपूर्ण तथ्य – मानस राष्ट्रीय उद्वान अपने दुर्लभ और लुप्तप्राय स्थानिक वन्यजीवों के लिए जाना जाता है, जैसे-असोम छत वाले कछुएँ, हेपीड खरगोश, गोल्डन लंगूर और पैगी हॉग। यहाँ एक सींग वाले गैंडे और बारहसिंगा विशेष रूप से पाए जाते हैं।

नाम – गोवा के गिरजाघर एवं कॉन्वेन्ट
स्थान – ओल्ड गोवा
घोषणा वर्ष – 1986
महत्वपूर्ण तथ्य – ओल्ड गोवा में एशिया का सबसे बड़ा चर्च है। ओल्ड गोवा में स्थित बासिलिका बोन जीसस चर्च, सेंट फ्रांसिस जेवियर को समर्पित है। बासिलिका बोन जीसस चर्च में सेंट फ्रांसिस जेवियर के अवशेष रखे गए हैं।

नाम – फतेहपुर सीकरी
स्थान – आगरा (उत्तर प्रदेश)
घोषणा वर्ष – 1986
महत्वपूर्ण तथ्य – फतेहपुर सीकरी हिन्दू और मुस्लिम वास्तुशिल्प के मिश्रण का सबसे अच्छा उदाहरण है। फतेहपुर सीकरी मस्जिद, शेख सलीम चिश्ती की दरगाह, आँख मिचौली, दीवान-ए-खास, बुलन्द दरवाजा आदि फतेहपुर सीकरी के प्रमुख स्मारक हैं।

नाम – हम्पी अवशेष
स्थान – हम्पी (कर्नाटक)
घोषणा वर्ष – 1986
महत्वपूर्ण तथ्य – तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित हम्पी नगर में अब केवल खण्डहरों के रूप् में ही अवशेष हैं। हम्पी का विशाल फैलाव गोल चट्टानों के टीलों में फैला है। घाटियों और टीलों के बीच पाँच सौ से भी अधिक स्मारक चिन्ह्र हैं।

नाम – खजुराहो के मन्दिर
स्थान – छतरपुर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र – 1986
महत्वपूर्ण तथ्य – खजुराहो के मन्दिर हिन्दू धर्म और जैन धर्म क स्मारकों का एक समूह है। यहाँ के मन्दिर नगारा वस्तु कला से स्थापित किए गए थे, जिनमें ज्यादातर मूर्तियाँ कामुक कला की है अर्थात् अधिकतर मूर्तियाँ नग्न अवस्था में स्थापित हैं।

नाम – एलिफेन्टा की गुफाएँ
स्थान मुम्बई (महाराष्ट्र)
घोषणा वर्ष – 1987
महत्वपूर्ण तथ्य – इसका ऐतिहासिक नाम घारपुरी है। यहाँ कुल सात गुफाएँ है, जिनमें पहाड़ियों को काटकर मूर्तियाँ व मन्दिर बनाए गए हैं। एलिफेन्टा नाम पुर्तगालियों द्वारा यहाँ पर बने पत्थर के हाथी के कारण दिया गया है।

नाम – सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान
स्थान – पश्चिम बंगाल
घोषणा वर्ष 1987
महत्वपूर्ण तथ्य – सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान एक बाघ संरक्षित क्षेत्र एवं बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र है। यह क्षेत्र मैन्ग्रोव के घने जंगलों से घिरा हुआ है और रॉयल बंगाल टाइगर का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है।

नाम – पत्तकल के स्मारक
स्थान – बागलकोट (कनार्टक)
घोषणा वर्ष – 1987
महत्वपूर्ण तथ्य – पत्तदकल क्षेत्र भारतीय स्थापत्य कला की वेसर शैली के आरम्भिक प्रयोगों वाले स्मारक समूहों के लिए प्रसिद्ध है। चालुुक्य वंश के राजाओं ने सातवीं और आठवीं शताब्दी में यहाँ अनेक मन्दिर बनवाए थे।

नाम – चोल मन्दिर
स्थान – तमिलनाडु
घोषणा वर्ष – 1987–2004
महत्वपूर्ण तथ्य – चोल मन्दिर, चोल शासकों द्वारा दक्षिणी भारत में बनवाए गए थे। ये मन्दिर हैं– बृहदेश्वर मन्दिर (तंजावुर में), गंगईकोंडा चोलीश्वरम का मन्दिर तथा ऐरावतेश्वर मन्दिर (दारासुरम में)।

नाम – नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान एवं फूलों की घाटी
स्थान – उत्तराखण्ड
घोषणा वर्ष – 1988—2005
महत्वपूर्ण तथ्य – नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान को नन्दा देवी राष्ट्रीय अभ्यारण्य के नाम से भी जाना जाता है। फूलों की घाटी, नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान का ही एक भाग है, जो गढ़वाल (उत्तराखण्ड) में स्थित है।

नाम – मुम्बई की विक्टोरियन गोथिक और आर्ट डेको इमारतें
स्थान – मुम्बई
घोषणा वर्ष – 2018
महत्वपूर्ण तथ्य – हाल ही में यूनेस्को द्वारा दक्षिण मुम्बई की दर्जनां विक्टोरिया गोथिक और आर्ट डेको इमारतों को विश्व विरासत का दर्जा प्रदान किया गया। ये इमारतें मुम्बई के वास्तुकला हेरिटेज का अलंकार है।

नाम – सांची का स्तूप
स्थान – रायसेन (मध्य प्रदेश)
घोषणा वर्ष – 1989
महत्वपूर्ण तथ्य – सांची का मुख्य स्तूप अशोक सम्राट ने बनवाया था। इसक केन्द्र में एक अर्धगोलाकार ईट निर्मित ढाँचा था, जिसमें भगवान बुद्ध के कुछ अवशेष रखे हुए थे।

नाम – हुमायूँ का मकबरा
स्थान – दिल्ली
घोषणा वर्ष – 1993
महत्वपूर्ण तथ्य – हुमायूँ का मकबरा मुगल वास्तुकला से प्रेरित है। इसमं बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया था। यहाँ मुख्य इमारत मुगल सम्राट हुमायूँ का मकबरा है और इसमें हुमायूँ की कब्र सहित कई अन्य राजसी लोगों की भी कब्रे हैं।

नाम – कुतुबमीनार
स्थान – महरौली (दिल्ली)
घोषणा वर्ष – 1993
महत्वपूर्ण तथ्य – कुतुबमीनार का निर्माण दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक कुतुबद्दीन ऐबक ने करवाया था। कुतुबमीनार ईट से बनी विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। इसमें 379 सीढ़ियाँ हैं। मीनार के चारों ओर बने अहाते में भारतीय कला के कई उत्कृष्ट नमूने हैं।

नाम – भारतीय पर्वतीय रेलवे
स्थान – दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल)
घोषणा वर्ष – 1999
महत्वपूर्ण तथ्य – भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में कई जगह रेलवे व्यवस्था की गई थी। जिन्हें सामूहिक रूप से भारतीय पर्वतीय रेलवे के नाम से जाना जाता है। इन रेलों में से निम्न चार रेल अभी भी चल रही है–दार्जिलिुंग हिमालयी रेल, नीलगिरी पवर्तीय रेल, कालका—शिमला रेल, माथेरान हिल रेल।

नाम – बोधगया का महाबोधि मन्दिर
स्थान – बोधगया (बिहार)
घोषणा वर्ष – 2002
महत्वपूर्ण तथ्य – महाबोधि मन्दिर या महाबोधि विहार, बोधगया स्थित प्रसिद्ध बौद्ध विहार है। यह विहार उसी स्थान पर खड़ा है, जहाँ गौतम बुद्ध ने ईसा पूर्व छठी शताब्दी में ज्ञान प्राप्त किया था।

नाम – भीमबेटका शैलाश्रय
स्थान – रायसेन (मध्य प्रदेश)
महत्वपूर्ण तथ्य – भीमबेटका स्थल आदि मानव द्वारा बनाए गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है, कि यह स्थान महाभारत के चरित्र भीम से सम्बन्धित है एवं इसी से इसका नाम भीमबेटका पड़ा।

नाम – चम्पानेर (पावागढ़ पार्क)
स्थान – गुजरात
घोषणा वर्ष – 2004
महत्वपूर्ण तथ्य – चम्पानेर-पावागढ़ पार्क में अनेकों स्मारक स्थित हैं, जिनमें से 38 स्मारकों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दायरे में लिया गया है। सवेक्षण में धरोहर का संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयत्न किया जा रहा है।

नाम – छत्रपति टर्मिनल
स्थान – मुम्बई (महाराष्ट्र)
घोषणा वर्ष – 2004
महत्वपूर्ण तथ्य – छात्रपति शिवाजी टर्मिनल मुम्बई का एक ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन है, जो मध्य रेलवे, भारत का मुख्यालय है। यह भारत के व्यस्त्तम स्टेशनों में से एक है। आँकड़ों के अनुसार, यह स्टेशन ताजमहल के बाद भारत का सर्वाधिक छायाचित्रित स्मारक है।

नाम – दिल्ली का लाल किला
स्थान – दिल्ली
घोषणा वर्ष – 2007
महत्वपूर्ण तथ्य – दिल्ली के लाल किले का निर्माण मुगल बादशाह शााहजहाँ ने करवाया था। यह किला लाल रेत पत्थर से निर्मित है। इस किले को इसकी दीवारों के लाल रंग के कारण 'लाल किला' कहा जाता है।

नाम – जयपुर का जंतर-मंतर
स्थान – जयपुर (राजस्थान)
घोषणा वर्ष – 2010
महत्वपूर्ण तथ्य – जयपुर का जंतर-मंतर सवाई जयसिंह द्वारा 1724 से 1734 के बीच निर्मित एक खगोलीय वेधशाला है। इस वेधशाला में 14 प्रमुख यन्त्र हैं, जो समय मापने, ग्रहण की भविष्यवाण करने, किसी तारे की गति एवं स्थति जानने, सौर मण्डल के ग्रहों के दिक्पात जानने आदि में सहायक है।

नाम – पश्चिमी घाट
स्थान – महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु
घोषणा वर्ष – 2012
महत्वपूर्ण तथ्य – भारत के पश्चिमी तट पर स्थित पर्वत श्रृंखला को पश्चिमी घाट कहते हैं। विश्व में जैविकीय विविधता के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है और इस दृष्टि से विश्व में इसका 8 वाँ स्थान है।

नाम – राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग
स्थान – राजस्थान
घोषणा वर्ष – 2013
महत्वपूर्ण तथ्य – राजस्थान के छ: पहाड़ी दुर्ग निम्न हैं–
1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग, 2. कुम्भलगढ़ दुर्ग, 3. रणथम्भोर दुर्ग, 4. गागरौन दुर्ग, 5. आमेर दुर्ग तथा 6. जैसलमेर दुर्ग। ये दुर्ग 8 वीं से 18 वीं सदी तक चले राजपूत शासन का प्रतीक हैं।

नाम – ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान
स्थान – कुल्लू (हिमाचल प्रदेश)
घोषणा वर्ष – 2014
महत्वपूर्ण तथ्य – ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इसमें 25 से अधिक प्रकार के वन, 800 प्रकार के पौधे और 180 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती है।

नाम – रानी की वाव
स्थान – गुजरात
घोषणा वर्ष – 2014
महत्वपूर्ण तथ्य – यह एक अनूठा वाव है। इसके खम्भे सोलंकी वंश और उनके वास्तुकला के चमत्कार के समय में ले जाते हैं। वाव की दीवारों और स्तम्भों पर अधिकांश नक्काशियाँ राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि आदि जैसे अवतारों के विभिन्न रूप भगवान विष्णु को समर्पित हैं।

नाम – नालन्दा महाविहार (नालन्दा महाविहार)
स्थान – नालन्दा (बिहार)
घोषण वर्ष – 2016
महत्वपूर्ण तथ्य – नालन्दा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विख्यात केन्द्र था। गुप्तकालीन सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने 415-454 ई. पू. नालन्दा विश्वविघालय की स्थापना की थी।

नाम – काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
स्थान – सिक्किम
घोषणा वर्ष – 2016
महत्वपूर्ण तथ्य – कंचनगंगा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1977 में की गई थी। इस उद्यान का कुल क्षेत्रफल लगभग 1784 वर्ग किमी है, जो सिक्किम के कुल क्षेत्रफल का 25.14% है। कस्तूरी मृग, हिम तेन्दुए तथा हिमालय तहर जैसे वन्यजीव उद्यान में रहते है।

नाम – चण्डीगढ़ कैपिटल कॉम्पलैक्स
स्थान – चण्डीगढ़
घोषणा वर्ष – 2016
महत्वपूर्ण तथ्य – चण्डीगढ़ कैपिटल कॉम्पलैक्स ली कोर्बुजिए द्वारा डिजायन किया गया एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है। यह 100 एकड़ जमीन क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें तीन इमारतें, तीन स्मारक और एक झील है।

नाम – अहमदाबाद सिटी
स्थान – अहमदाबाद (गुजरात)
घोषण वर्ष – 2017
महत्वपूर्ण तथ्य – अहमदाबाद शहर की स्थापना सुल्तान अहमद शाह ने 1411 ईस्वी में की थी। इस नगर को भारत का मैनचेस्टर भी कहा जाता है। यह नगर साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है।

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