जानिए विशेष राज्य का दर्जा क्या है?

किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा कैसे मिलता है? इसके अन्तर्गत राज्य को क्या लाभ मिलते हैं? वर्तमान में कौन से राज्य विशेष दर्जा प्राप्त राज्य है? आइए जानते हैं कि आखिर विशेष राज्य का दर्जा है क्या–


किसे मिलता है विशेष राज्य का दर्जा ?
भारतीय संविधान में किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने का प्रावधान नहीं है। लेकिन केंद्र सरकार उन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देती है जिनके इलाके दुर्गम होते हैं या अन्य राज्यों की तुलना में संसाधनों के लिहाज से पिछड़े होते है। नैशनल डिवेलपमेंट काउंसिल ने कई तथ्यों जैसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र, कम जनसंख्या घनत्व या बड़ा आदिवासी बहुल इलाका, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से जुड़ी सीमा, प्रति व्यक्ति आय और गैर कर राजस्व कम के आधार पर ऐसे राज्यों की पहचान की थी।

पूर्व में नहीं थी विशेष राज्य का दर्जा योजना
देश की तीसरी पंचवर्षीय योजना यानी 1961-66 तक और फिर 1966-1969 तक केंद्र के पास राज्यों को अनुदान देने का कोई निश्चित फॉर्म्युला नहीं था। उस समय तक सिर्फ योजना आधारित अनुदान ही दिए जाते थे। 1969 में केंद्रीय सहायता का फॉर्म्युला बनाते समय पांचवें वित्त आयोग ने गाडगिल फॉर्म्युले के अनुरूप तीन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया- असम, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर। इसका आधार था इन राज्यों का पिछड़ापन, दुरूह भौगोलिक स्थिति और वहां व्याप्त सामाजिक समस्याएं। उसके बाद के वर्षों में पूर्वोत्तर के बाकी पांच राज्यों के साथ अन्य कई राज्यों को भी यह दर्जा दिया गया।



विशेष राज्य का दर्जा मिलने के फायदे
केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाले पैकेज में 90 फीसदी रकम बतौर मदद मिलती है। इसमें 10 फीसदी रकम ही बतौर कर्ज होती है।  जबकि दूसरी श्रेणी के राज्यों को केंद्रीय सहयोग के तहत 70 प्रतिशत राशि ऋण के रूप में और 30 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में दी जाती है।

वर्तमान में किन राज्यों को मिला है विशेष राज्य का दर्जा
भारत में 29 राज्यों में से 11 राज्यों को विशेष दर्जा मिला है जिनके नाम हैं, अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड। ज्यादातर पहाड़ी राज्यों को विशेष राज्य दर्जा मिला है। इसमें पूर्वोंत्तर के लगभग सभी राज्य हैं।

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