रोहिंग्या मुसलमान: कौन है और क्या है समस्या जानिए


हमारा पड़ोसी देश म्यांमार में वर्ष 2015 के पहले 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान थे, जिनकी संख्या अब आधी रह गई है। म्यांमार उन्हें अपना नागरिक नहीं मानता। रोहिंग्या मुसलमानों को साबित करना होगा कि 1823 के पहले उनके पूर्वज वहां रहते थे। वरना वे विदेश प्रवासी या 1982 के बर्मा नागरिकता कानून के तहत 'संधिवद्ध-नागरिक' कहलाएंगे। बि​ट्रिश भारत का हिस्सा रहा म्यांमार 4 जनवरी, 1948 तक दिल्ली से शासित था। जब यह आजाद हुआ तो वहां से गैर बौद्ध और गैर-संजातीय नागरिकों को निकाला गया। इनमें रोंहिग्या शामिल थे। 1962 में आए सैनिक शासन में सवा तीन लाख बर्मावासी भारतीयों को देश छोड़ना पड़ा। रोहिंग्या भी बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान), पाकिस्तान व भारत आने लगे। कुछ साधन संपन्न अन्य देशों में पलायन कर गए।


बड़ी संख्या में रोहिंग्या नागरिकता पाने की उम्मीद में वहीं रुक गए। वे रखाइन प्रांत में रहे, लेकिन दशकों तक नागरिकता नहीं मिली। बौद्धों से उनके विवाद होने लगे। वर्ष 2012 में हुए एक दुराचार कांड के बाद दोनों समुदायों में जबर्दस्त हिंसा हुई, परिणामस्वरूप रोहिंग्याओं का पलायन तेज हो गया। 10 लाख रोहिंग्या म्यांमार के शरणार्थी कैंपों में भेजे गए। म्यांमार में 2015 में लोकतंत्र आया, ले​किन सरकार ने उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया।

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