इस विश्वविद्यालय से पढ़े हो तो जाएगी डिग्री और नौकरी


नोएड़ा स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने दिल्ली के एक युवक को नौकरी देने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया क्योंकि वह डाक्टर भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा (Dr. Bhim Rao Ambedkar University, Agra) से पढ़ा है। उस कंपनी का कहना है कि उसके रिकार्ड में यह विश्वविद्यालय काली सूची में है। साथ ही यह भी बताया कि डॉ. बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय के हजारों फर्जी अंकपत्रों के चलते यह निर्णय लिया गया है। उधर इसका पता चलने पर विश्वविद्यालय के छात्र सकते में आ गए हैं।


मूलरूप से आगरा के खेरिया निवासी राजेश चौहान ने 2008 में आगरा कालेज से बी.ए. व्यक्तिगत रूप से पास किया। उसने बीत दिनों नोएड़ा की बहुराष्ट्रीय कंपनी में आवेदन किया। जिस पर दो अक्टूबर माह को साक्षात्कार में चार लाख रुपये सालाना वेतन पर उनका चयन ​ हुआ। दो दिन में नियुक्ति पत्र भेजने की बात कही गई। तय दिन के बाद कोई सूचना न आने पर पांच अक्टूबर को कंपनी में फोन पर जानकारी की। वहां से बताया गया कि आप डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्र हैं, जिसकी मार्कशीट फर्जी पाई जाती हैं। कई मामले सामने आने पर इसकी विश्वसनीयता नहीं रही है। ऐसे में कंपनी ने इसे काली सूची में रखा है। इसलिए आपको नौकरी नहीं मिल सकती।


ये सुन राजेश अवाक रह गए। उन्होंने कुलसचिव को आनलाइन शिकायत कर पूरा माजरा बताया। पूर्व छात्र राजेश ने बताया कि विश्वविद्यालय के फर्जीवाड़े के चलते कंपनी ने उन्हें नौकरी नहीं दी, जबकि वह साक्षात्कार में पास हो गए थे। इससे पहले भी कई छात्रों को इसी वजह से नौकरी नहीं मिली।

सनद रहे, कि 20 साल पहले तक डाक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की साख पूरे देश में थी। पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह इस यूनिवर्सिटी के छात्र रहे है। विश्वविद्यालय ने महान साहित्यकार और खिलाड़ी भी देश को दिए है।

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