भारतीय मिसाइल पृथ्वी-2 का सफल परीक्षण


भारत ने देश में विकसित और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम पृथ्वी-2 मिसाइल का 18 मई को ओडिशा के चांदीपुर स्थित केंद्र से सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण सेना के उपयोग के लिहाज से प्रायोगिक परीक्षण था। सतह से सतह पर मार करने में सक्षम इस मिसाइल का परीक्षण यहां एकीकृत परीक्षण रेंज पर प्रक्षेपण परिसर-3 से सुबह करीब 9.40 बजे किया गया।

मिसाइल के प्रक्षेपण पर डीआरडीओ रडार और इलेक्ट्रो आॅप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम से निगरानी की गई। बंगाल की खाड़ी में इसके प्रभाव स्थल पर एक पोत पर तैनात टीम ने नीचे आने के इसके पूरे सफर का परीक्षण किया।

स्वदेशी टेक्नोलॉजी से बनी 350 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली पृथ्वी-2 मिसाइल 500 से एक हजार किलोग्राम तक के आयुध ले जाने में सक्षम है और इसमें लिक्विड प्रोपल्शन टिवन इंजन लगे हैं। इस मिसाइल के परीक्षण से स्पष्ट संकेत है कि भारत किसी भी आपात स्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

बैलेस्टिक नष्ट करने की क्षमता 
इसके पहले 15 मई को बहुस्तरीय बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली हासिल करने के प्रयास के तहत भारत ने स्वदेशी सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्ष किया था। यह मिसाइल उसकी ओर आने वाली किसी भी शत्रु बैलेस्टिक मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखती है।

पहले भी सफल ट्रायल 
इससे पहले पृथ्वी-2 का सफल यूजर ट्रायल 16 फरवरी, 2016 और 14 नवंबर 2014 को किया गया था। पृथ्वी-2 लिक्विड और सॉलिड, दोनों तरह के ईंधन से ऑपरेट होती है। यह परंपरागत और परमाणु, दोनों तरह के हथि?यार ढोने में सक्षम है। पृथ्वी-2 में दो इंजन लगे है जिसकी लंबाई 8.56 मीटर, चौड़ाई 1.1 मीटर और वजन 4,600 किलोग्राम है। यह मिसाइल 483 सेकेंड तक और 43.5 किमी की ऊंचाई तक उड़ान भर सकती है।

पृथ्वी-2 की खासियत 
पृथ्वी-2 बैलिस्टिक मिसाइल 500 से 1000 किलो वजनी न्यूक्लियर हथियार से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करेगी।
अग्नि मिसाइलों के बाद यह भारत की प्रमुख बैलिस्टिक मिसाइल है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी तकनीक से यह मिसाइल बनाई है।
एडवांस टेक्नोलॉजी वाली पृथ्वी-2 मिसाइल में 2 इंजन लगाए गए है।

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