जानिये क्या है तापी गैस परियोजना | TAPI Project


भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तथा तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान के नेताओं ने 13 दिसबंर, 2015 को तुर्कमेनिस्तान के प्राचीन शहर मैरी में महत्वाकांक्षी 7.6 अरब डालर की तापी गैस पाइपलाइन परियोजना की आधारशिला रखी। तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) गैस पाइपलाइन परियोजना पर 7.6 अरब डालर का खर्च आने का अनुमान है। इस पाइपलाइन के जरिए भारत में बिजली संयंत्रों को गैस की आपूर्ति की जाएगी।

सभी नेताओं ने एक बटन को दबाया जिसके बाद पाइप को जमीन में डालने की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने पाइप और एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। दस्तावेज को एक कैप्सूल में डालकर जमीन के अंदर रख दिया गया। बर्दीमुहामेदोव ने उम्मीद जताई कि परियोजना दिसंबर 2019 तक चालू हो जाएगी। इसकी गैस वहन क्षमता 9 करोड घन मीटर दैनिक होगी और यह 30 साल तक चलेगी। इससे भारत और पाकिस्तान को प्रतिदिन 3.8-3.8 करोड घन मीटर और अफगानिस्तान 1.4 करोड घन मीटर गैस प्राप्त होगी।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति गनी ने कहा कि गैस पाइपलाइन के साथ साथ चारों देश फाइबर आप्टिक केबल के जरिए भी जुडेंगे। इसके अलावा एक बिजली पारेषण लाइन भी तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान व पाकिस्तान को जोडेगी। तापी के जरिए तुर्कमेनिस्तान के गलकीनाइश क्षेत्र से गैस कांधार (अफगानिस्तान) व मुल्तान (पाकिस्तान) होते हुए फाजिल्का (भारत) पहुंचेगी।

क्या है तापी परियोजना
तापी गैस पाइपलाइन परियोजना 7.6 अरब डॉलर (करीब 510 अरब रुपये) की है। यह 1814 किलोमीटर लंबी है। इसकी क्षमता 30 साल की अवधि के लिए 90 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (एमएससीएमडी) गैस की है। इसमें से भारत और पाकिस्तान को 38-38 एमएससीएमडी और अफगानिस्तान को शेष 14 एमएससीएमडी गैस मिलेगी। यह पाइपलाइन तुर्कमेनिस्तान के गलकीनाइश क्षेत्र से कंधार (अफगानिस्तान) व मुल्तान (पाकिस्तान) होते हुए फाजिल्का (भारत) पहुंचेगी। तापी पाइपलाइन कंपनी लिमिटेड (टीपीसीएल) में पाकिस्तान की कंपनी इंटरस्टेट गैस सिस्टम्स, तुर्कमेनिस्तान की तुर्कमेंगस, अफगानिस्तान की अफगान गैस एंटरप्राइज और भारतीय कंपनी गेल लिमिटेड की समान हिस्सेदारी है।

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