पीसीएस-2016 से सीसैट होगा सिर्फ क्वालीफाइंग पेपर

उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने 28 दिसंबर को हिंदी भाषी छात्रों को बड़ी राहत देते हुए उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा में सीसैट को क्वालीफाइंग कर दिया है। अब इस परीक्षा में प्रतियोगियों के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक हासिल करना ही जरूरी होगा। यह व्यवस्था पीसीएस-2016 से ही लागू होगी। प्रतियोगी छात्र लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे।

सनद रहे, कि 2011 की आइएएस प्रारंभिक परीक्षा से सीसैट लागू हुआ था। उत्तर प्रदेश में इसे 2012 की पीसीएस परीक्षा से लागू किया गया था। लेकिन हिंदी भाषी प्रतियोगियों की सफलता का ग्राफ गिरने की वजह से इसका विरोध होने लगा था। जिसके परिणाम स्वरूप अंतत: आइएएस-2014 प्रारंभिक परीक्षा में इसे क्वालीफाइंग कर दिया गया। यानी, मेरिट निर्धारण में सीसैट के अंक शामिल नहीं किए जाएंगे। सिर्फ सामान्य अध्ययन के पेपर के आधार पर मेरिट तय होगी। इसके बाद से प्रदेश में भी इसे हटाने की मांग की जा रही थी। इसके अलावा प्रतियोगी दो अतिरिक्त मौका दिए जाने की भी मांग कर रहे थे।

अब आयोग में शासन का पत्र आ चुका है। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि सम्मिलित राज्य प्रवर अधीनस्थ सेवा प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन के दूसरे प्रश्नपत्र को अर्हकारी (क्वालीफाइंग) किया जा रहा है। इसमें छात्रों को 33 प्रतिशत न्यूनतम अंक हासिल करने होंगे। यह निर्णय 2016 की परीक्षा से प्रभावी होगा।

क्या है सीसैट?
सी-सैट का मतलब है सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट। इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा के सिलेबस और पैटर्न में कई बदलाव किए गए है। सीसैट में लागू हो जाने के बाद प्रतियोगियों को वैकल्पिक विषयों में से किसी एक चुनाव नहीं करना होता था। सभी को एक जैसे प्रश्न हल करने होते हैं।


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