ट्यूनीशियाई समूह को शांति का नोबेल मिला


अरब क्रांति के बाद ट्यूनीशिया में शांतिपूर्ण लोकतंत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले वहीं के एक प्रमुख समूह नेशनल डायलॉग क्वार्टेट को साल 2015 के नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा जाएगा। नोबेल पुरस्कार समिति ने 9 अक्टूबर को इसकी घोषणा की। नोबेल समिति का मानना है कि इससे ट्यूनीशिया और बाकी देशों को लोकतंत्र के लिए प्रेरणा मिलेगी।

नोबेल समिति के अनुसार, 2011 के जैस्मिन क्रांति के बाद ट्यूनीशिया में बहुलवादी लोकतंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए क्वार्टेट को यह पुरस्कार दिया जा रहा है। इस क्रांति के बाद अरब देशों में लोकतांत्रिक देशों वाले समिति ने कहा कि जब ट्यूनीशिया अरब क्रांति की आग में जल रहा था, तब क्वार्टेट ने आम लोगों के बीच शांतिपूर्ण संवाद कायम करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस पुरस्कार का लक्ष्य बाकी देशों को ट्यूनीशिया के नक्शेकदम पर चलने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस बार का नोबेल शांति पुरस्कार ट्यूनीशिया में लोकतंत्र की रक्षा के प्रति योगदान होगा। साथ ही उन सभी को प्रेरित करेगा, जो मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका तथा बाकी दुनिया में शांति और लोकतंत्र को बढ़ावा देना चाहते हैं।

आगामी 10 दिसम्बर को ओस्लो में क्वार्टेट को पुरस्कार के रूप में 80 लाख स्वीडिश क्राउन( नौ लाख 72 हजार डॉलर) की राशि प्रदान की जायेगी।

चार संगठनों ने बनाया क्वार्टेट
ट्यूनीशिया अरब क्रांति की जन्मस्थली रहा है। इस क्रांति के बाद से देश में तानाशाह बेन अली का पतन हो गया था, जिसके बाद से क्वार्टेट ने देश में शांतिपूर्ण लोकतंत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। क्वार्टेट सिविल सोसायटी समूहों का गठबंधन है, जो 2013 में वजूद में आया था। यह उत्तरी अफ्रीकी देश के चार प्रमुख संगठनों से मिलकर बना है। ये संगठन हैं, ट्यूनीशियन जनरल लेबर यूनियन, द ट्यूनीशियन कंफेडेरेशन ऑफ इंडस्ट्री, ट्रेड एंड हैंडीक्राफ्ट, द ट्यूनीशियन ह्यूमन राइट्स लीग और द ट्यूनीशियन ऑर्डर ऑफ लायर्स। ये संगठन ट्यूनीशियाई समाज के विभिन्न वर्गों और मूल्यों को प्रदर्शित करते हैं।


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