सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलों पर कमेटी बनी


स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 70 साल पहले मौत होने या उनके लापता होने से जुड़ी सारी फाइलों को सार्वजनिक किए जाने की संभावना पर गौर करने के लिए केंद्र सरकार ने 15 फरवरी को एक कमेटी बनाने का फैसला लिया। कमेटी बनाने से अब संभावना है कि केंद्र सरकार नेताजी से जुड़े फाइलों को सार्वजनिक कर सकती है। सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलों के संदर्भ में सरकारी गोपनीयता कानून की समीक्षा के लिए कैबिनेट सचिव के नेतृत्व में अंतर मंत्रालय समिति गठित की।

केंद्र सरकार ने नेताजी से जुड़ी फाइलों या दस्‍तावेजों को सार्वजनिक करने को लेकर बनाई उच्‍चस्‍तरीय समिति ये फैसला करेगी कि कब और किस रूप में नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक किया जाएगा। समिति की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव अजीत सेठ करेंगे। समिति की पहली बैठक 16 फरवरी को होने की संभावना है। इसमें गृह एवं विदेश विभाग, रॉ और खुफिया विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उधर, गृह मंत्रालय ने नेताजी से जुड़ी कोई भी फाइल अपने पास होने से इनकार किया। सूत्रों के अनुसार नेताजी से जुड़ी 83 फाइलें हैं। जिनमें से 58 फाइलें पीएमओ और 25 फाइलें विदेश मंत्रालय के पास है।

नेताजी के पौत्र सूर्य कुमार बोस ने जर्मनी में बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और दावा किया कि नेताजी से जुड़ी सभी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की उनकी मांग पर मोदी ने विचार करने का आश्वासन दिया है। सूर्य ने मोदी के सम्मान में जर्मनी में भारतीय राजदूत विजय गोखले की ओर से आयोजित समारोह में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान सूर्य ने नेताजी से संबंधित सभी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की। सूर्य ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि दस्तावेजों को जल्द सार्वजनिक किया जाए क्योंकि वह हालिया खबरों से स्तब्ध हैं कि जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने नेताजी के परिवार की जासूसी कराई थी।

बता दें कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में नेताजी को अंतिम के बार देखा गया था जिसके बाद से वह लापता हैं।

क्या है सरकारी गोपनीयता कानून?
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923 जासूसी विरोधी (स्पाई और सीक्रेट एजेंट) एक्ट है जो कि ब्रिटेन साम्राज्य से चला आ रहा है। एक्ट में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी एक्शन जो देश के दुश्मनों को मदद दे, इस एक्ट के दायरे में आता है। इसमें यह भी कहा गया है कि कोई भी सरकार की ओर से प्रतिबंधित क्षेत्र, कागजात आदि को नहीं देख सकता और ना ही देखने की मांग कर सकता है।

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