नेपाल में 7.9 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही


नेपाल सहित उत्तर और पूर्वी भारत में आज 25 अप्रैल को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। अमेरिका के जियोलोजिकल सर्वे ने नेपाल में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.9 बताई है। इससे पहले इसकी तीव्रता 7.5 बताई गई थी। हालांकि, चाइना अर्थक्वैक नेटवर्क्‍स सेंटर के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 8.1 है।

नेपाल में रिक्टर पैमाने पर 7.8 तीव्रता का जोरदार भूकंप आने के बाद भारी तबाही हुई है। जिसमें मरने वालों की संख्या 688 हो गई है। काठमांडू में धारहारा मीनार (भीमसेन टॉवर), जानकी मंदिर (सीता का जन्मस्थान) और दरबार स्क्वायर पूरी तरह से तबाह हो चुका है। घोराही, भरतपुर, भैरवा, लामजुम, पोखरा, बुटवल, लुंबनी और तिलोत्तमा में जबरदस्त नुकसान हुआ है। निचले इलाकों में नुकसान ज्यादा बताया जा रहा है। दोनों ही भूकंप के केंद्र काठमांडू से 75 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम स्थित लामजुंग में थे। पहले भूकंप का केंद्र लामजुंग से 29 किलोमीटर पूरब और दूसरे का 49 किलोमीटर पूरब में था।

हिमालय में हिमस्खलन
एवरेस्ट बेस कैम्प में भारी हिमस्खलन होने से कम से कम अाठ लोगों के मौत हो चुकी है। नेपाल टूरिज्म के अधिकारियों ने बताया कि कैम्प-1 और कैम्प-2 पूरी तरह से जमीन में दफ्न हो गया।

मशहूर धारहारा मीनार ढही
काठमांडू में मशहूर धारहारा टॉवर ढह गई। नौमंजिला मीनार को नेपाल की कुतुब मीनार कहा जाता था। यह विदेशी पर्यटकों में काफी लोकप्रिय थी। इसे देखने के लिए 160 लोगों ने टिकट लिया था। जिनके फंसे होने की आशंका है। नेपाल के साथ भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के भी कई हिस्सों में जबरदस्त झटके महूसस किए गए। भारत के कई उत्तर आैर पूर्वी राज्यों भी तेज झटके महसूस किए गए हैं।

फोन लाइन ठप
नेपाल की राजधानी काठमांडू में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है। पुराने काठमांडू के हनमनढोका इलाके में भारी तबाही हुई है। लामजुंग और इसके आसपास टेलीफोन सेवा ठप हो गई है। यह इलाका भूकंप के केंद्र के नजदीक है।

इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा भूकंप
नेपाल में स्थानीय समयानुसार 11 बजे 42 मिनट पर पहला झटका महसूस किया गया। यह नेपाल के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा भूकंप है। इससे पहले 1934 में नेपाल और उत्तरी बिहार में 8.0 तीव्रता का भूकंप आया था। जिसमें 10,600 जानें गईं थी।

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